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परमहंस स्कूल में नौनिहालों की जान से खिलवाड़! नशे में धुत्त चालक ने दौड़ाया बच्चों से भरा बोलेरो, खाई में गिरते-गिरते बचा, मची चीख-पुकार

By Roshan Yadav

September 9, 2026

परमहंस स्कूल में नौनिहालों की जान से खिलवाड़! नशे में धुत्त चालक ने दौड़ाया बच्चों से भरा बोलेरो, खाई में गिरते-गिरते बचा, मची चीख-पुकार

कथित नशे में चालक द्वारा वाहन चलाने का आरोप, वायरल वीडियो से ग्रामीणों में आक्रोश; पूर्व शिकायतों और जांच के बावजूद कार्रवाई पर उठे सवाल

सूरजपुर। परमहंस विद्या निकेतन स्कूल, सरहरी में मंगलवार को स्कूली बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। बच्चों को लेकर जा रही स्कूल की बोलेरो वाहन क्रमांक CG 15 B 5750 सड़क से नीचे उतरकर अनियंत्रित हो गई और खाई में गिरने से बाल-बाल बची। वाहन में बच्चे सवार थे। अचानक वाहन के अनियंत्रित होने से बच्चों में चीख-पुकार मच गई और कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत रही कि वाहन खाई में पूरी तरह नहीं गिरा और एक बड़ा हादसा टल गया।

घटना के बाद बच्चों और अभिभावकों में दहशत का माहौल है। घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात भी सामने आ रही है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों ने स्कूल की परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे वाहन और उसके चालक की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है?

कथित नशे में चालक पर वाहन चलाने का आरोप

घटना को लेकर अभिभावकों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनका कहना है कि जिस समय बच्चों को लेकर वाहन चलाया जा रहा था, उस दौरान चालक कथित रूप से शराब के नशे में था। हालांकि, चालक के नशे में होने के आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

यदि जांच में चालक के नशे में होने का आरोप सही पाया जाता है तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। बच्चों की जिम्मेदारी ऐसे चालक के हाथों में सौंपना उनकी सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही माना जा सकता है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन को चालक की नियुक्ति और ड्यूटी से पहले उसकी पात्रता तथा आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।

पूर्व शिकायतों के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

मामले को लेकर अभिभावकों का दावा है कि स्कूल की परिवहन व्यवस्था और चालक को लेकर पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं। उनका यह भी कहना है कि शिकायतों के बाद जांच की कार्रवाई हुई थी, लेकिन इसके बावजूद परिवहन व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

इसी वजह से मंगलवार की घटना के बाद पूर्व शिकायतों की जांच रिपोर्ट और उस पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि यदि पहले ही शिकायतों को गंभीरता से लेकर प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो आज बच्चों की सुरक्षा को लेकर ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

अब यह भी जांच का विषय है कि पूर्व शिकायतें किस विभाग या अधिकारी के पास की गई थीं, जांच में क्या तथ्य सामने आए थे और जांच के बाद स्कूल प्रबंधन अथवा वाहन चालक के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई थी।

बोलेरो, वैन और छोटे वाहनों में बच्चों को ले जाने का आरोप

अभिभावकों ने स्कूल की परिवहन व्यवस्था को लेकर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्चों को बस जैसे सुरक्षित और निर्धारित मानकों वाले वाहनों के बजाय बोलेरो, मारुति वैन तथा छोटे मालवाहक वाहनों में स्कूल लाया-ले जाया जा रहा है।

कुछ अभिभावकों ने वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाए जाने की शिकायत भी की है। यदि ऐसा पाया जाता है तो यह बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय होगा। प्रशासन को प्रत्येक वाहन में निर्धारित क्षमता के अनुसार ही बच्चों को बैठाए जाने की स्थिति की जांच करनी चाहिए।

स्कूली वाहनों के मामले में वाहन की फिटनेस, वैध दस्तावेज, चालक की पात्रता, निर्धारित क्षमता, सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक मानकों का पालन किया जाना जरूरी है। ऐसे में घटना के बाद अभिभावकों की मांग है कि स्कूल से जुड़े सभी वाहनों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।

वाहन की फिटनेस से लेकर चालक की जांच की मांग

अभिभावकों ने प्रशासन से हादसे की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जिस वाहन से बच्चों को ले जाया जा रहा था, उसकी तत्काल तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। वाहन की फिटनेस, परमिट, बीमा, चालक का लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही चालक की नशे की स्थिति को लेकर लगाए गए आरोपों की भी जांच आवश्यक बताई जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए केवल कागजी जांच के बजाय मौके की वास्तविक स्थिति और वाहन संचालन व्यवस्था का भौतिक सत्यापन होना चाहिए।

एक मान्यता से अलग-अलग जगह स्कूल संचालन का आरोप

अभिभावकों ने स्कूल की मान्यता को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि एक ही मान्यता के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि इस आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यदि यह शिकायत जांच में सही पाई जाती है तो शिक्षा विभाग को स्कूल की मान्यता, भवन, छात्र संख्या, शिक्षक व्यवस्था और स्कूल संचालन के वास्तविक स्थान का सत्यापन करना होगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि स्कूल के नाम पर संचालित सभी परिसरों को विभागीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है या नहीं।

गांव-गांव निजी स्कूल, निगरानी व्यवस्था पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि प्रतापपुर विकासखंड में पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न स्थानों पर निजी स्कूलों का संचालन बढ़ा है। ऐसे में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। ग्रामीणों की मांग है कि केवल घटना के बाद जांच करने के बजाय निजी स्कूलों की नियमित निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।

स्कूलों की मान्यता, भवन, अग्नि सुरक्षा, छात्र संख्या, शिक्षक व्यवस्था और परिवहन साधनों की समय-समय पर जांच होनी चाहिए, ताकि किसी गंभीर हादसे से पहले कमियों को दूर किया जा सके।

कलेक्टर ने दिए निजी स्कूलों की जांच के निर्देश

मामले को लेकर सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील ने कहा कि घटना को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग को जांच के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने यह भी कहा कि प्रतापपुर विकासखंड में संचालित निजी स्कूलों की जांच कराई जाएगी और यह देखा जाएगा कि स्कूल किन-किन स्थानों पर संचालित हो रहे हैं। इससे एक मान्यता के आधार पर अलग-अलग स्थानों पर स्कूल संचालन संबंधी लगाए जा रहे आरोपों की भी वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

अब जांच से खुलेगा पूरा मामला

मंगलवार की घटना ने एक बार फिर स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वाहन खाई में गिरने से बाल-बाल बचने की घटना ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन घटना के बाद परिवहन व्यवस्था की जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग की जांच में वाहन की फिटनेस, चालक की स्थिति, बच्चों की संख्या, स्कूल की परिवहन व्यवस्था, पूर्व शिकायतों और स्कूल की मान्यता से जुड़े आरोपों पर क्या तथ्य सामने आते हैं। साथ ही यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो प्रशासन की कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है।

बड़ा सवाल यही है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन अब सख्त कदम उठाएगा या किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था जागेगी?

Roshan Yadav

Owner/Editor Chhattisgarh24.in Mo. 8225950078

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